Friday, 29 July 2022

स्व जागरण में हिंदी पत्रकारिता का योगदान

 स्व जागरण में हिन्दी पत्रकारिता का योगदान

अशोक कुमार सिन्हा
'हिन्दी, हिन्दू हिन्दुस्थान' का नारा देश के 'स्व' जागरण एवं स्वतन्त्रता आन्दोलन के लिये प्रसिद्ध राष्ट्रवादी पत्रकार, शिक्षा विद, राजनेता एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी पं0 मदन मोहन मालवीय जी ने दिया था। यह नारा इतना प्रसिद्ध हुआ कि आज तक इसका प्रयोग हो रहा है। देश की हिन्दी पत्रकारिता देश में  'स्व'  जागरण तथा स्वतन्त्रता आन्दोलन की ध्वजवाहिका रही है और आजादी के पचहत्तर वर्ष पूर्ण होने के की बाद भी इसकी महत्ता बनी रहेगी। देश में आज भी प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया देश के, स्वनागरण में पूरी निष्ठा से रत है यही कारण है कि चाहे पूरे देश में राष्ट्रवाद देशप्रेम और  'स्व' जागरण का कार्य एक साथ सम्भव हो रहा है। बाबू विष्णुराव राव पराड़कर जी ने कहा था कि ''परतन्त्रता विष नदी मांगल्यविध्वंसिनी''। अन्याय, अज्ञान, प्रपीडऩ और प्रवंचना के संहारक हिन्दी के ही पत्र-पत्रिकाएँ अग्रज भूमिका में रही है। स्वतन्त्रता आन्दोलन से ले कर आज तक 'स्व' जागरण के महायज्ञ में हिन्दी पत्रकारिता की डाली गई आहुति सतत स्मरणीय रहेगी और आज भी सार्थक भूमिका निभा रही है। पत्रकारिता जनभावना की अभिव्यक्ति रही है। स्वतन्त्रता आन्दोलन के समय कहा जाता था कि:-
खींचो न कमानों को, न तलवार निकालो।
जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो।।
भारत की हिन्दी पत्रकारिता ने जनमानस की भाव लहरियों पर अद्भुत प्रभाव डालने का कार्य किया है। स्वतन्त्रता के 75वें वर्ष में प्रवेश करने के बाद भी आज यह अनन्त यात्रा जारी है। बस रूप परिवर्तित हुआ है। भाव वही बना हुआ है। 'स्व' जागरण हेतु महार्षि अरविन्द, भूपेन्द्र नाथ दत्त, डॉ. एनी बेसेन्ट, बाल गंगाधर तिलक, प. मदन मोहन मालवीय, गणेश शंकर विद्यार्थी और महात्मा गान्धी जैसे महापुरुषों ने राष्ट्र के 'स्व' जागरण हेतु समाचार पत्रों से अपना सम्बन्ध रखा। राष्ट्रीय चेतना के अन्तर्गत मातृभूमि का स्तवन, स्वदेश गौरव-गान, अतीत चिन्तन, राष्ट्रीय जागरण, वीर प्रशस्ति, संघर्ष, 'स्व' से, प्रेम, यवनो के प्रति घृणा, स्वदेशी का प्रचार, समाज सुधार, राष्ट्रभाषा के विषय हिन्दी पत्रकारों के प्रिय विषय होते थे। महर्षि अरविन्द घोष ने कहा था कि राजनैतिक स्वतन्त्रता राष्ट्र की प्राण वायु है और इसकी अवज्ञा कर के सामाजिक सुधार, नैतिक उत्थान और 'स्व' का जागरण असम्भव है। हिन्दी पत्रकारिता ने न केवल जनमानस में 'स्व' की भावना भरी वरन जागरण कर के संघर्ष का वातावरण निर्माण किया। तभी अंग्रेजों ने भारत छोड़ा। उदन्त मार्तण्ड, बंगदूत, समाचार सुधावर्षण, बनारस अखबार, पयामे आजादी एक जुट हो कर जनजागरण और स्वतन्त्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है का नारा लगाया। संवाद कौमुदी, दैनिक आज, रणभेरी, कविवचन सुधा, भारत मित्र जैसे समाचारपत्रों ने नवजागरण और भारतीयता तथा स्वदेशी का उद्घोष किया। पत्रकारों में बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र राधा चरण गोस्वामी, प्रेमधन, अम्बिकादत्त व्यास, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, लाल-बाल-पाल की तिकड़ी ने जनजागरण में प्राण फूंक दिया था। बच्चा-बच्चा स्वदेशी का गीत गाने लगा। स्वतन्त्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे पा कर रहेगें- भारतवासियों के सर पर चढ़ कर बोलने लगा। कालाकांकर से और बाद में प्रयागराज से प्रकाशित 'हिन्दुस्तान' मे संस्कृति और स्वदेश के प्रति जागरूक बनाया। बाबू विष्णुराव पराड़कर के लेखों पर अंग्रेजों को सेंसरशिप लगानी पड़ी। बालमुकुन्द गुप्त, अम्बिका प्रसाद वाजपेयी, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपतराय, गणेश शंकर विद्यार्थी, जैसे उग्र राष्ट्रवादी पत्रकारों को ने देश के अन्दर 'स्व' का इतना प्रचण्ड लहर पैदा कर दिया कि अंग्रेजो के दांते खट्टे हो गये। लोकमान्य तिलक के सन्देशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिये पूजा से प्रकाशित केसरी का हिन्दी संस्करण को पं. माधवराव सपे्र ने 13 अप्रैल 1907 को नागपुर से निकाला। मराठी केसरी के विभिन्न लेखों का हिन्दी अनुवाद कर के हिन्दी केसरी में प्रकाशित किया जाता था। प्रयागराज से प्रकाशित 'स्वराज' नामक साप्ताहिक के सम्पादक शान्ति नारायण भटनागर को 'स्व' जागरण के अपराध में जेल जाना पड़ा। काशी की नागरी प्रचारिणी पत्रिका (1897) तथा सरस्वती (1900) ने अपने साहित्यिक स्वरूप से स्वदेशी और हिन्दी भाषा के अलख को जगाये रखना।
महात्मा गान्धी के स्वाधीनता आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा भारत छोड़ो आन्दोलन को नवजीवन, हरिजन, युगान्तर बन्दे मातरम्, नवशाक्ति संध्या, अभ्युदय, कर्मयोगी, मर्यादा, आज, प्रताप, स्वतन्त्र भारत, अर्जुन, वर्तमान कर्मवीर, हिन्दू पंच, सुधा, विशाल भारत आदि बसों हिन्दी पत्र में राष्ट्रीय चेतना में परिवर्तित कर दिया।
बाबूराव विष्णु पराड़कर ने 1943 में काशी से 'संसार' नामक पत्र का प्रकाशन किया। दैनिक आज के प्रधान सम्पादक रहे तथा 'रणभेरी' नामक गुप्त पत्र निकाल कर काशी सहित पूर्वाचंल में स्वतन्त्रता आन्दोलन में जन जागरण करते रहे। मराठी मूल के होते हुए इन्होंने हिन्दी भाषा के लिये अतुलनीय कार्य किया। 'स्व' जागरण हेतु इन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। माखनलाल चतुर्वेदी मूलतः: कवि एवं पत्रकार थे। वे कहते थे कि युग के घटनाओं के नियंत्रक, संचालक, आलोचक और लेखक को ही पत्रकार कहते हैं। नवीन युग का निर्माण करना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।
समाज में 'स्व' के जागरण हेतु अर्वाचीन युग बहुत ही सार्थक एवं निष्ठावान रहा। अब धारणा है कि पत्रकारिता मिशन से व्यवसाय हो गया है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता का व्यवसाय से जुडऩा युग धर्म है। कोई स्वरूप समाज में स्थाई नहीं रहता। युग बदलने पर स्वरूप भी, अवश्य बदलेगा। स्वतन्त्रता काल में पत्रकारिता शस्त्र एक शस्त्रशाला दोनो थी पत्रकारिता। स्वतन्त्रता के समय पत्रकारों एवं वकीलों की अहम भूमिका थी। आज की पत्रकारिता भी जनजागरण के कार्य में उसी निष्ठा से रत है। राष्ट्रवाद का इतनी तेजी से प्रचार-प्रसार एवं भारतीय समाज का संगठित होना इस बात का प्रमाण है। राजस्थान में कन्हैयालाल के गर्दन काटने और अमरावती में हृदय विदारक घटना के प्रति समाज को खड़ा करने में पत्रकारिता एवं सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही। जैसे स्वतन्त्रता युग में चौरी-चौरा काण्ड और जलियांवाला बाग की घटना को पूरे विश्व में पत्रकारिता के माध्यम से विस्तारित किया गया। उसी प्रकार आज भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टी0वी0 और सोशल मीडिया अपनी भूमिका को उसी प्रकार सटीकता के साथ उठा रहा है। राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि, ज्ञानवापी में शिव मन्दिर प्रकरण के साथ-साथ ताजमहल, कुतुब मीनार, लखनऊ के लक्ष्मण टीला पर समाज के 'स्व' को जगाने का कार्य जनसामान्य के साथ हिन्दी मीडिया पूरी निष्ठा के साथ कर रही है।
मीडिया जनता के प्रतिनिधि होने के साथ साथ गूंगी जनता के मुखर वकील की भूमिका आज भी निभा रही है। पत्रकारिता के साथ राष्ट्रीय जागरण का लम्बा इतिहास जुड़ा हुआ है। मीडिया ने 1947 के समय भी यह सिद्ध किया था कि स्वतन्त्रता मात्र एक मनोभाव, विचार या नारा नहीं वरन जीवन जीने की बुनियादी शर्त है। ये इतना बड़ा मूल्य है कि उसके लिये आप प्राणों की बाजी भी लगा सकते हैं। कुछ भी गंवा सकते है। पत्रकारिता ने हमें वह मूल्य दिया है। यही भाव इस समय समाज को राष्ट्रभाव के जागरण में हिन्दी पत्रकारिता सहित सभी भारतीय भाषाओं में हो रहा है। पत्रकार विद्वान नहीं विद्यावान होता है। हमारी परम्परा रही है कि विद्वान में थोड़ा सा प्रभुता बोध होता है जब कि विद्यावान में विनम्रता। जब आप में विनम्रता होती है तो लक्ष्य प्राप्ति में बाधाएँ कम आती है।
आज की पत्रकारिता आधुनिक जीवन का विश्वकोष बन गई है। अकेले उत्तर प्रदेश से 42 समाचारपत्र असहयोग आन्दोलन के समर्थन में निकले थे। जनता के लिये काम करना पत्रकारिता का महत्वपूर्ण कार्य बन गया है। ऐसा नहीं था कि पुराने समय में पत्रकारिता उद्योग नहीं था। स्वदेश, स्वराज औ स्वाजागरण को पत्रकारिता ने अपना लक्ष्य बना लिया था। आज भी पत्रकारिता में राष्ट्रवाद की भावना जनता के सम्मान की रक्षा तथा उसकी समस्याओं को सुलझाने में मीडिया की भूमिका अहम है। सूचना के अधिकार ने इस 'स्व' के जागरण में एक अहम भूमिका निभाई है। हिन्दी भाषी क्षेत्र से प्रकाशित, प्रसारित और सोशल मीडिया के सहयोग से जनसहभागिता स्व का निर्धारण तथा उसके प्रति नवजागरण का कार्य करने के लिये मीडिया धन्यवाद की पात्र है।
(लेखक विश्व संवाद केन्द्र लखनऊ के प्रमुख, पत्रकारिता के अध्यापक तथा पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हैं।)

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हस्तिनापुर




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Friday, 8 April 2022

अटर प्रदेश चुनाव: जीता सबका विश्वास

 

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Thursday, 17 February 2022

स्वतंत्रता आंदोलन के उत्प्रेरक पत्रकार

 स्वतन्त्रता आन्दोलन के उत्प्रेरक पत्रकार

* अशोक कुमार सिन्हा
हिन्दी पत्रकारिता भारत में अपने जन्म काल से ही स्वतन्त्रता आन्दोलन में उत्प्रेरक की भूमिका में अग्रणी रही। अन्याय, अज्ञान, प्रताडऩा और राष्ट्र धर्म निभाने वालों का उत्पीड़न यदि उजागर हुये तो यह कार्य समाचार पत्रों ने किया। स्वतन्त्रता आन्दोलन में पत्र-पत्रिकायें व पत्रकार जन भावना की अभिव्यक्ति बने। पत्रकारों ने अपने कलम से भारतीय क्रान्तिवीरों का जहां मार्गदर्शन किया, वहीं जनमानस का मनोबल बढ़ाया। लगभग प्रत्येक स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी ने अपने आन्दोलन के विविध कार्यों के साथ समाचार पत्र भी निकालें। महर्षि अरविन्द घोष, भूपेन्द्रनाथ दत्त, डॉक्टर एनी बेसेन्ट, महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय आदि सभी ने अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराने के लिये अखबार प्रकाशित करने का कार्य किया है। उस समय यह माना जाता था कि-
खींचो ना कमानो को,
ना तलवार निकालो।
जब तोप मुकाबिल हो तो,
अखबार निकालो।।
उग्र राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत पत्रकारों के लेखन से अंग्रेज बहुत भयभीत और परेशान रहते थे। प्रसिद्ध क्रान्तिवीरों में सरदार भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त, आचार्य नरेन्द्र देव, योगेश चन्द्र चटर्जी, शचीन्द्रनाथ सान्याल, यशपाल अपने लेखों से इन पत्रों में जन जागरण और जोश भरने का कार्य करते थे। उदन्त मार्तण्ड (कोलकाता), कवि वचन सुधा (काशी), हिन्दुस्तान (लन्दन एवं कालाकांकर प्रतापगढ़) सरस्वती (काशी), प्रताप (कानपुर), कर्मवीर (जबलपुर), आज (बनारस), 'अल्मोड़ा' अखबार, बिहार बन्धु (पटना), हिन्दी केसरी (पूना), मराठी केसरी (पूना), स्वराज (इलाहाबाद), और गुप्त पत्रों में 'रणभेरी', 'शंखनाद', 'चिञ्गारी 'रणडंका', 'चण्डिका' और 'तूफान' नामधारी पत्रों ने स्वतन्त्रता आन्दोलन में अंग्रेज शासकों के दांत खट्टे कर दिये थे। गुप्त पत्रों को निकालने में विष्णुराव पराड़कर, रामचन्द्र वर्मा, विश्वनाथ शर्मा, दुर्गा प्रसाद खत्री, दिनेश दत्त आदि तपस्वियों ने विप्लव पत्र के रूप में इसे निकाला। इन गुप्त पत्रों के प्रकाशक एवं मुद्रक डीएम व  प्रकाशन स्थान कोतवाली लिखे जाते थे। गुप्तचर विभाग इन गुप्त पत्रों के छपने का स्थान ढूंढता रहा परन्तु रोज प्रात: चार बजे स्वतन्त्रता सेनानी लोगों के घरों में चौखट के नीचे से अखबार सरका जाते थे। इन पत्रों में देश को स्वतन्त्र कराने और अंग्रेजी शासन के अत्याचार और लूटमार की खबरें प्रमुखता से मुद्रित की जाती थीं। जन जागरण का अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध इनमें सामग्री भरी रहती थी।
प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय 8 फरवरी 1857 को स्वतन्त्रता आन्दोलन नेता अजीमुल्ला खाँ ने 'पयामे आजादी' दिल्ली से प्रकाशित किया। इसका मराठी संस्करण झांसी से प्रकाशित होता था। इसमें मंगल पाण्डे, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मी बाई आदि की संघर्ष कथाएं मुद्रित होती थीं। 1900 से 1920 के युग में लोकमान्य तिलक के मराठी दैनिक 'केसरी' ने राजनैतिक जड़ता को तोड़कर भारतीय समाज को पूर्ण स्वराज्य की ओर प्रेरित किया। 1905 में बंगाल विभाजन की घोषणा होने पर महर्षि अरविन्द ने 'वन्दे मातरम' प्रकाशित कर अंग्रेजों को सन्देश दिया कि, भारत भारतीयों के लिये है। इसी समय युगान्तर (बांग्ला), 'संध्या' (बंगला) भी प्रकाशित हुये। 2 जनवरी 1881 से अंग्रेजी में प्रकाशित 'मराठा' और 3 जनवरी 1881 से मराठी भाषा में लोकमान्य तिलक ने 'केसरी' प्रकाशित कर घोषित कर दिया कि स्वतन्त्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे। लोकमान्य तिलक की लेखनी प्रभावी और भाषा अक्रामक होती थी। 1903 में नागपुर से हिन्दी केसरी का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ जिसके सम्पादक माधव राव सप्रे थे। 9 नवम्बर 1913 में कानपुर से 'प्रताप' का प्रकाशन हुआ जिसके कर्ताधर्ता सम्पादक गणेश शंकर विद्यार्थी थे। पत्र के  प्रथम मुख्य पृष्ठ पर ही निम्न पंक्तियाँ सिद्धान्त रूप में छपती थीं।-
जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है।
वह नर नहीं, नर-पशु निरा है और मृतक समान है।
1919 में गोरखपुर से 'स्वदेश' का प्रकाशन हुआ जिसके सम्पादक और संस्थापक दशरथ प्रसाद द्विवेदी थे। यह पत्र 1939 तक चला। इसमें राष्ट्रीय विचार से उग्र लेख लिखने पर बेचन शर्मा 'उग्र' व सम्पादक दशरथ शर्मा द्विवेदी को समय-समय पर जेल जाना पड़ता था। जलियाँवाला बाग काण्ड के बाद महात्मा गांधी द्वारा 'यंग इण्डिया' इसी का गुजराती संस्करण 'नवजीवन' और 'हिन्दी नवजीवन' प्रकाशित होना प्रारम्भ हुआ जो बाद में 'हरिजन' नाम से संयुक्त रूप से प्रकाशित होने लगा। इन पत्रों ने असहयोग सत्याग्रह और भारत छोड़ो आन्दोलन को सक्रियता प्रदान की। 1920 में जबलपुर से 'कर्मवीर, सप्ताहिक और 1923 में अर्जुन को 1939 में 'वीर अर्जुन, का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ जिसके सम्पादक इन्द्र विद्यावाचस्पति थे। पत्र का आदर्श वाक्य था 'न दैन्य न पलायनम्,। बाबूराव विष्णु पराडकर एवं आचार्य नरेन्द्र देव भूमिगत पत्रकारिता के प्रमुख स्तम्भ थे जिन्होंने 'बवण्डर,, 'रणभेरी,, 'बोल दे धावा,, 'शंखनाद, और ज्वालामुखी को साइम्लोस्टाइल छाप कर जनता को जगाया।
1930 में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द ने 'हंस, प्रकाशित किया जिसके प्रथमांक में स्पष्ट किया गया कि ''मगर स्वाधीनता केवल मन की वृत्ति है। इस वृत्ति का जागना ही स्वाधीन हो जाना है। अब तक इस विचार ने जन्म ही न लिया था। हमारी चेतना इसी मन्द, शिथिल और निर्जीव हो गई थी, उसमें ऐसी महान कल्पना का अविर्भाव ही ना हो सकता था, पर भारत के कर्णधार महात्मा गांधी ने इस विचार की सृष्टि कर दी। अब यह बढ़ेगा फूले-फलेगा'' 1 जनवरी 1943 ईस्वी को बाबूराव विष्णु पराड़कर के सम्पादन में 'संसार' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। क्रान्तिकारी यशपाल ने 'विप्लव' प्रकाशित किया। 1938 के इसके अंक में छपा ''आज हम अपनी गुलामी की इन हथकडिय़ों को तोड़ डालने के लिये अपनी दासता के बन्धनों को आग में जला देने के लिये विप्लव के कुण्ड में कूद पड़े हैं। आज हिचकिचाने का और शंका करने का समय नहीं है।''
5 सितम्बर 1920 से बनारस के बाबू शिवप्रसाद गुप्त ने ज्ञान मण्डल लिमिटेड की स्थापना कर हिन्दी दैनिक 'आज' का प्रकाशन प्रारम्भ किया। राष्ट्रप्रेम से अनु प्रमाणित इस पत्र ने सदैव ब्रिटिश शासन की दमनात्मक नीतियों का विरोध किया। अंग्रेजों द्वारा एकाधिकबार इसके प्रकाशन पर प्रतिबन्ध लगाया। 21 अक्टूबर 1930 से 8 मार्च 1931 तक विरोध स्वरूप सम्पादकीय स्तम्भ के स्थान पर केवल यह वाक्य प्रकाशित होता था कि ''देश की दरिद्रता, विदेश जाने वाली लक्ष्मी, सर पर बरसने वाली लाठियां, देशभक्तों से भरने वाला कारागार, इन सबको देख कर प्रत्येक देश भक्त हृदय में जो अहिसांमूलक विचार उत्पन्न हो, वही सम्पादकीय विचार हैं।
आज के संवाददाताओं में महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू तथा इसके सम्पादकों में श्री प्रकाश एवं विष्णु राव पराडकर प्रमुख थे। पराडकर जी ने अपने प्रथम सम्पादकीय में लिखा- ''हमारा उद्देश्य अपने देश के लिये सब प्रकार से स्वातन्त्र्य उपार्जन है। हम हर बात में स्वतन्त्र होना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य यह है कि हम अपने देश का गौरव बढ़ायें, अपने देशवासियों में स्वाभिमान का संचार करें, उनको ऐसा बनायें कि भारतीय होने का उन्हें अभिमान हो, संकोच न हो।'' 'आज' ने अपने इस उद्देश्य को पूरा किया।
इस दौर की प्रकार पत्रकारिता ने राजनीति को साहित्य में अलग कर दिया। मतवाला, हंस, चांद, माधुरी जैसी पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। 31 मई 1924 के 'मतवाला' के सम्पादकीय में अन्तिम पैरा में छपा... यदि आप स्वतन्त्रता के अभिलाषी हैं, अपने देश में स्वराज की प्रतिष्ठा चाहते हैं तो तन मन धन से अपने नेता महात्मा गांधी के आदेशों का पालन करना आरम्भ कीजिये। 1923 में राजस्थान सेवा संघ की ओर से 'तरुण राजस्थान' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ जो निर्भीकता से सम्पादक शोभालाल गुप्त और रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में स्वतन्त्रता का शंखनाद हुआ। दोनों सम्पादकों पर राजद्रोह का मुकदमा चला और छह-छह  महीने की सजा हुई। सेवा संघ के कार्यालय पर पुलिस का छापा पड़ा जहां संवाददाताओं की सूची अंग्रेजों के हाथ लगी और उन पर कहर ढाया गया।
स्वतन्त्रता आन्दोलन में क्रान्तिवीरों में जोश भरने और अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिलाने वाले साहित्य साधक गया प्रसाद शुक्ल सनेही को हमें स्मरण करना चाहिये। जिसकी कविता और रचनायें अंग्रेजों को त्रिशूल की भांति चुभती थीं। ये देश प्रेम और मानवतावाद के अनोखे कवि थे। 21 अगस्त 1883 को उन्नाव जनपद में हड़हा गांव में जन्मे इस कवि को सार्वजनिक कवि सम्मेलन के आयोजन का श्रेय तो जाता ही है साथ ही राष्ट्रीय चेतना के उन्नायक के रूप में प्रसिद्ध हुये। त्रिशूल नाम से इनकी कवितायें कानपुर के प्रताप सहित अन्यान्य पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती थी।
अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 20 अक्टूबर 1890 को इलाहाबाद के अतर सुइया में हुआ था। बाद में पीजीएन कॉलेज कानपुर में अध्यापन करते समय क्रान्तिकारी सुन्दरलाल से प्रभावित हुए। इन्होंने 'प्रताप' का सम्पादन किया जहां उनका सम्पर्क भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद से मुलाकात हुई। रामवृक्ष बेनीपुरी भगवती चरण वर्मा की पहली रचनायें 'प्रताप' में ही छपी। गणेश जी भारती युवक, हरि, दिवाकर,  वक्रतुण्ड, कलाधर, लम्बोदर, वन्दे मातरम और गजेन्द्र आदि छद्म नाम से राष्ट्रीय भक्ति का अलख जगाया और अपनी सादगी, सेवा भावना व सक्षम लेखनी से अमर हो गये। वे एक निर्भीक देशभक्त सेनानी थे। 25 मार्च 1931 को वे कानपुर में अज्ञात मुस्लिम धर्मान्धो के हाथ शहीद हो गये।
माखन लाल चतुर्वेदी मूलत: कवि और स्वदेश गौरव गान, राष्ट्रीय जागरण, यवनों के प्रति घृणा स्वदेशी के प्रचार और भारत माता के वन्दना में वे महान हो गये।
स्वतन्त्रता की अलख जगाने में अल्मोड़ा से प्रकाशित 'अल्मोड़ा अखबार' की बुद्धि वल्लभ पन्त, कुमाऊं केसरी के बद्री दत्त पाण्डेय अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ लिखने पर जुर्माने के भागीदार बने। उस समय की एक कहावत थी कि ''एक गोली के तीन शिकार, मुर्गी, कुली और अल्मोड़ा अखबार''। इस क्षेत्र में अल्मोड़ा अखबार के बन्द होने पर 18 अक्टूबर 1918 में विजय दशमी के दिन  'शक्ति' नाम से बद्रीदत्त पाण्डेय ने दूसरा अखबार निकाला जो स्वतन्त्रता आन्दोलन में उत्प्रेरक का एक स्तम्भ बना। इसी क्रम में 1930 में विजय और 1937 में उत्थान व इडिपिडेन्ट इण्डिया और 1939 में पिताम्बर पाण्डेय ने हल्द्वानी से जागृत जनता का प्रकाशन किया जो अपने आक्रामक तेवरों के कारण 1940 में उसके सम्पादक को सजा व 300 रुपये जुर्माने का दण्ड मिला।
यह सुस्पष्ट है कि हिन्दी के पत्र स्वतन्त्रता आन्दोलन के सक्षम सेनानी सिद्ध हुये हम स्वतन्त्र हुये और आज स्वतन्त्रता 75 वर्षों का अमृत महोत्सव मना रहे हैं अत: इन पत्रकारों को हम श्रद्धांजलि देते हुये इनकी प्रेरणात्मक रचनाओं व शैली को नमन करते हैं।
* प्रसिद्ध लेखक, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एवं विश्व संवाद केन्द्र अवध लखनऊ के प्रमुख हैं।
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अन्नदाता की खुशहाली का बजट

 अन्नदाता की खुशहाली का बजट 2022

* अशोक कुमार सिन्हा
भारत सरकार ने एक फरवरी को 39.45 लाख करोड़ रुपये का बजट स्वीकृति हेतु संसद के समक्ष प्रस्तुत किया है। यह बजट गत वर्ष की अपेक्षा 4.61 लाख करोड़ रुपये अधिक है। बजट में ग्रामीण भारत को प्राथमिकता इस बात का संकेत है कि केन्द्र सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील है। आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। खेती किसानी में आधुनिक सोच और तकनीक का महत्व बढ़ा है। किसान सम्मान निधि, कुसुम योजना, फसल बीमा योजना व पेंशन योजना आदि से भी किसानों की खुशहाली बढ़ी है। देश में कृषि निर्यात बढ़ाने के लिये 46 जिलों समूहों (कलस्टरों) की पहचान की गई है। किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) तथा निर्यातकों को एक मंच पर लाने के लिये विशेष कदम उठाया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट उद्बोधन में कहा कि हाईटेक खेती से अन्नदाता ताकतवर बनेंगे। कृषि क्षेत्र की योजनाएं तर्कसंगत बना कर समग्रता से लागू किया जाएगा। देशभर में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जायेगा। फसल आंकलन, भूमि अभिलेख के कंप्यूटरीकरण तथा कीटनाशकों व पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन तकनीकि को बढ़ावा दिया जायेगा। बजट में यह दृढ़ता व स्पष्टता से संदेश दिया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले से भी अधिक दृढ़ता के साथ लागू रहेगा। बजट प्रस्ताव में पहली बार सरकारी खरीद को सम्मिलित किया गया है। रबी 2021-22 तथा खरीफ सीज ने 12.08 करोड़ टन गेहूं व धान की सरकारी खरीद की जाएगी। इसका लाभ 1.63 करोड़ किसानों को मिलेगा। इस खरीद पर 2.37 लाख करोड़ रुपए में किया जायेगा। भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाएगा।
इस बार बजट में रसायन मुक्त खेती का लक्ष्य रखते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने पर बल दिया गया है  जिसके लिए एक व्यापक पैकेज बनाया जायेगा। केन्द्र सरकार गंगा नदी के किनारे पांच किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर में प्राकृतिक खेती पर विशेष बल देते हुए पूरे देश में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे देश के 80  प्रतिशत किसानों को लाभ मिलेगा।
कृषि में मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2023 को अन्तर्राष्ट्रीय पोषक अवाज वर्ष घोषित किया गया है। किसानों की माली हालत को मजबूत बनाने के लिये एग्रो व निजी वनीकरण को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया गया है। तिलहनी फसलों की खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिसके लिये बजट में विशेष ध्यान रखा गया है। इससे देश में आयात घटेगा।
आधुनिक खेती के साथ प्राकृतिक व जीरो बजट खेती के लिये मानव संसाधन व विज्ञानी तैयार करने के लिये देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों अनुसंधान संस्थानों के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में मूल्यवर्धन पर जोर दिया जायेगा जिसके लिये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पाठ्यक्रम तैयार करने हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
विशेष हाईटेक कृषि हेतु सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र (पी.पी.पी. मॉडल) में सम्मिलित प्रयास से गठित फण्ड से कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप की मदद की जायेगी जो कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन, पट्टे पर खेती करने और सहकारी खेती करने के लिए कृषि मशीनरी आदि तैयार करेंगे।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत प्रतिवर्ष केन्द्र सरकार 6000 हजार रुपये सहायता राशि के बजट में 3000 हजार करोड़ रुपये की और वृद्धि की घोषणा की है।
रूपये 44.605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा नदी परियोजना के लिये 1,400 रूपये का आवंटन किया गया है। इससे नदियों को जोड़ कर सिचांई से खुशहाली लाने का अभिनव प्रयास किया गया है। पानी की कमी से जुझ रहे बुन्देलखण्ड की प्यास बुझेगी। 9.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस परियोजना से सिचांई हो सकेगी। 62 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा। परियोजना में 103 मेगावाट बिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन भी होगा। इसी प्रकार देश की नदियों को जोड़ने की और योजना संचालित हो रही है। बजट में सहकारिता के टैक्सेशन की विसंगतियाँ दूर कर दी गई है। कृषि में टिकाऊ विकास पर फोकस किया गया है।
वर्ष 2022-23 के बजट में देशभर के किसानों को डिजिटल और हाईटेक सेवाओं के वितरण के लिये किसान ड्रोन तकनीकि को बढ़ाने का प्रयास किया गया है। जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगें। फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कीटनाशकों व पोषक तत्वों के छिड़काव में मदद मिलेगी।
किसानों को फल व सब्जियों की सही प्रजातियों का प्रयोग करने के लिये सरकार पैकेज देगी जिसमें राज्य की भी भागीदारी होगी। कृषि उपकरण सस्ते होंगे। नाबार्ड की सहायता से कृषि से जुड़े स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यम को वित्तीय सहायता दी जायेगी। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम से किसानों की मदद की जायेगी। फसल बीमा योजना के लिये 15,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिससे बाढ़, सूखा, महामारी, आदि के समय किसानों की फसल बर्बाद होने पर क्षतिपूर्ति हो सकेगी।
उर्वरक सब्सिडी पर 1,05,222 करोड़ रुपये व्यय करने का प्राविधान है। इससे सस्ती दर पर खाद मिल सकेगी। कृषि एवं संबद्ध कार्य कलाप पर बजट से 1,51,527  करोड़ की धनराशि के बंदोबस्त की बात कही गई है। 2021-22 में यह आकड़ा 1,47,764 करोड़ रुपये था। सरकार दूध, शहद, मछली उत्पादन में किसानों की विशेष प्रोत्साहन योजना को कार्यान्वित किया जायेगा। वर्ष 2020-21 में देश में 1,984 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ है। बीते 5 वर्षों में खाद्यान उत्पादन सर्वाणिक रहा है। मछली उत्पादन वर्ष 1950-51 में 752 हजार टन था जो करीब अब 20 गुना अधिक हो गया है।
कुल मिला कर यह बजट वृद्धि को गति देने वाला और खपत तथा रोजगार को बढ़ावा देने वाला बजट है। अन्नदाता इस बजट से अपने जीवन की खुशहाली में वृद्धि कर सकेगा।


***2023 मोटा अनाज वर्ष घोषित****
मोनोक्रॉपिंग (एक तरह की खेती) से भूजल संकट बढ़ता जा रहा है। अब किसानों को मोटे अनाज पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जिससे मानव स्वास्थ्य के साथ ही मिट्टी की सेहत भी बरकरार रहे। सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाज की घरेलू खपत को बढ़ाने के लिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक में सहायता की जाएगी। मोटे अनाज कम पानी में पैदा हो जाते हैं, इससे उन जगहों पर बढ़ावा दिया जाएगा जहां पानी का संकट है। जिससे कि भूजल का दोहन कम हो और कीटनाशकों का अन्धाधुन्ध इस्तेमाल पर भी रोक लगे।  
* लेखक विश्व संवाद केन्द्र, लखनऊ के प्रमुख है।

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Thursday, 16 December 2021

उत्तरप्रदेश में सुशासन हेतु चुनाव

 उत्तर प्रदेश में सुशासन हेतु चुनाव-2022

यू.पी. चुनाव 2022: फिर योगी सरकार
अशोक कुमार सिन्हा
उत्तर प्रदेश ने चौदह में से मोदी सहित नौ प्रधानमंत्री दे कर अपनी राजनैतिक चेतना का परिचय दिया है। भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध ने अपने जन्म हेतु इसी धरा को चुना।
स्वतंत्रता संग्राम का यह प्रदेश सबसे प्रभावशाली क्षेत्र रहा है। भारतीय संस्कृति की विराट झांकी इस प्रदेश में मिलती है। प्रयाग, चित्रकूट, अयोध्या, काशी, मथुरा, श्रावस्ती, कुशीनगर, गोरक्षधाम, मेरठ, नोएडा (हस्तिनापुर), आगरा, कन्नौज और लखनऊ जैसे ख्याति प्राप्त नगरों का यह विशाल राज्य अपनी व्यवस्था के लिए वर्ष 2022 में नई सरकार के गठन के लिए नई सरकार चुनने जा रहा है। 2,40,928 वर्ग किमी के विस्तृत क्षेत्रफल में कुल 75 जनपदों में यह प्रदेश  विभाजित है। उत्तराखण्ड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र हैं। गंगा, यमुना, रामगंगा, राप्ती, गोमती, घाघरा (सरयू) बेतवा और केन नदियों से अभिसिंचित यह प्रदेश विशाल कृषि क्षेत्र सहित 21,833 वर्ग किमी वनावरण से आच्छादित है। लोकसभा को 80 सांसद यहां से प्रतिनिधित्व करते हैं। कुल 404 विधानसभा सदस्य, 100 विधान परिषद सदस्य, 31 राज्यसभा सदस्य यहां से चुने जाते हैं। 2022 में 18वीं विधानसभा का चुनाव होगा क्योंकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 14 मई 2022 को समाप्त होने जा रहा है। विगत चुनाव में 14.66 करोड़ मतदाताओं की संख्या गणना की गई थी। 61'% मतदान हुआ था। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा, मणिपुर में भी चुनाव होंगे परन्तु सभी राजनीतिज्ञों की नजर उत्तर प्रदेश पर रहेगी क्योंकि यह राजनैतिक विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली की केन्द्रीय सरकार के बनने में सर्वाधिक महत्व उत्तर प्रदेश की सरकार पर निर्भर करता है। विगत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 312 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। समाजवादी गठबन्धन को 54 सीटें मिली थी। बहुजन समाज पार्टी को 19 सीटें मिली थीं। प्रदेश की साक्षरता दर 67.7' है परन्तु राजनैतिक चेतना प्रबल है। कुल 1,06,774 गांवों में बसा यह प्रदेश नई चुनाव के आहट से सजग हो गया है।
फरवरी से मार्च 2022 के मध्य प्रदेश में चुनाव होंगे। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी, अपना दल (नेता अनुप्रिया पटेल) व, निषाद पार्टी (नेता प्रवीण कुमार निषाद) एक तरफ मैदान में ताल ठोक रहे हे। बी.जे.पी. अन्य दलों से भी गठबन्धन बनाने के लिये प्रयासरत है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी (नेता अखिलेश यादव) राष्ट्रीय लोकदल (नेता जयंत चौधरी), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (नेता ओम प्रकाश राजभर) तथा राष्ट्रीय जनता दल (नेता तेजस्वी यादव) एक साथ चुनाव लडेंग़े। और दलों को भी गठबन्धन में सम्मिलित करने के प्रयास जारी हैं। बहुजन समाज पार्टी खामोशी से अकेले चुनाव लडऩे को तैयार है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (नेता संय सिंह) तृणमूल कांग्रेस (नेता नीरज राय) शिवसेना (नेता उद्धव ठाकरे) भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (नेता गिरीश शर्मा), भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी माक्र्सवादी (नेता हीरा लाल यादव), जनतादल युनाइटेड, जनतादल लोक तान्त्रिक (नेता रघुराज प्रताप सिंह) आल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) नेता शौकत अली व ओवैसी के नेतृत्व में चुनाव मैदान में है। AIMIM  ने अकेले 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। अपना दल (नेता कृष्णा पटेल) जनाधिकार पार्टी (नेता बाबू सिंह कुशवाहा) विकासशील इंसान पार्टी (नेता मुकेश साहनी) लोक जनशक्ति पार्टी (नेता चिराग पासवान) आजाद समाज पार्टी (नेता चन्द्रशेखर आजाद रावण) भी चुनाव मैदान में हैं। प्रदेश पूर्वाचल, मध्य क्षेत्र, बुन्देलखण्ड व पश्चिमी उ.प्र. के जाट बहुल क्षेत्र में विभाजित है। केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही 164 विधान सभा सीटें और 33' मतदाता है।
प्रदेश में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी दल, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के मध्य में हैं। इनकी ताकत व संगठन क्षमता भी इसी क्रम में है। नरेन्द्र मोदी व योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बी.जे.पी. का चुनाव अभियान जहां तेजी से प्रारम्भ हो गया है। वहीं अखिलेश यादव जनरथ यात्रा पूरी कर चुके हैं। प्रियंका गांधी भी पूरा जोर लगा रही हैं। प्रचार में बहुजन समाज पार्टी जातिगत सम्मेलनों में व्यस्त हैं। मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुल 8 विधानसभा सीटें क्रमश: वाराणसी उत्तरी, वाराणसी कैण्टोनमेन्द, रोहनियाँ, शिवपुर, सबरी, पिण्डरा, अजगरा और वाराणसी दक्षिणी हैं। विगत चुनाव में अधिकतर सीटों बी.जे.पी. के हाथ लगी थीं।
विगत 2017 में कुल 7 चरणों में चुनाव हुये थे। इस वर्ष चुनाव आयोग ने चुनावी तैयारियाँ लगभग पूरी कर ली हैं। विगत चुनाव में राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन (बी.जे.पी.+अपना दल(सोनेलाल पटेल)+सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) ने कुल 325 सीटों पर जीत प्राप्त की थी और 41.35' मत प्राप्त हुये थे। गत चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 28.7 प्रतिशत मत प्राप्त कर 54 सीटें जीती थी जिनके 47 समाजवादी पार्टी ने व 7 सीटें कांग्रेस ने जीती थी। बहुजन समाज पार्टी को 22.23' मत व 19 सीटें मिली थीं। राष्ट्रीय लोकदल को 1.78' मत व एक सीट मिली थी। निषाद पार्टी को एक व निर्दलीयों को  तीन सीटें प्राप्त हुई थी। यद्यपि आगामी चुनावों में समीकरण बदले हैं। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं और उनकी लोकप्रियता भारत के स्तर पर बढ़ी है। समाजवादी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव जीतना चाहती है। मुख्य मुकाबला इन्ही दो दलों के मध्य है। योगी जी ने डबल इंजन की सरकार बनाकर प्रदेश में वास्तविक प्रगति के आंकड़ों में वृद्धि की है। पूर्वांचल एक्सप्रेस हाईवे का उद्घाटन कराया है और प्रयागराज से मेरठ एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास कर रहे है।
नि:संदेह अपराध दर में गिरावट आई है। डकैती, लूट, हत्या दंगा, बालात्कार और बलवों में कमी आई है। 59 नये थाने, 29 नई चौकियां, 4 नई महिला  थाने और आर्थिक अपराध शाखा के 4, विजिलेंस के 10, साइबर क्राइम के 16 थाने व 59 नये अग्निशमन केन्द्र खुले हैं। बड़े अपराधी जैसे मुख्तार अंसारी अतीक अहमद, संजय सिंह व दबंग नेता, आजम खां जेल में हैं व  सरकार द्वारा इनकी संपत्तियां      कब्जे में ली गई हैं। अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति से समाज पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित हुआ है। महिला सुरक्षा हेतु मिशन शक्ति के अच्छे परिणाम आये है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोरोना काल में उत्तम व्यवस्था के कारण योगी की प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की है। 30 नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हो चुकी है या हो रही है। 2 नये नये एम्स (गोरखपुर व रायबरेली) में संचालित हो गये हैं। ऑक्सीजन प्लाटों की स्थापना से अब भरपूर ऑक्सीजन प्रदेश में उपलब्ध है।
प्रदेश में एक्सप्रेस वे व हाइवे का संजाल तीव्र गति से विकसित होने के कारण व 5 नये अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की व 17 नये एयरपोर्ट के निर्माण प्रक्रिया से प्रदेश पूंजी निवेश के क्षेत्र में देश में 14वें स्थान से प्रोन्नत हो कर दूसरे स्थान पर आया है।केवल कोरोना काल में 56000 करोड़ का पूजी निवेश हो गया। देश की पहली डिस्प्ले यूनिट व डेटा सेन्टर पार्क स्थापित हो रहे है। सैन्य उपकरणों हेतु डिफेंस कॉरिडोर ने नई आशा जगाई है। ग्रेटर नोएडा में एशिया का सबसे सुन्दर जेवर एयरपोर्ट बनाने व फिल्म सिटी की घोषणा से राष्ट्रीय फिल्म उद्योग को यू.पी. में नई संभावनाएं दिखाई पड़ रही है। योगी सरकार का दावा हे कि सर्वाधिक चीनी उत्पादन एवं गन्ना मूल्य भुगतान, नई मिलों का संचालन, गोरखपुर खाद कारखाना स्थापित होने के कारण प्रगति को नया आयाम मिला है। वर्ष 1972 से लम्बित सरयू नहर व बांध योजना पूर्ण होने से पूर्वांचल के 30 जिलों को लाभ मिला है। 11 अन्य सिंचाई परियोजना पूर्ण हुई है।
केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधामंत्री सौभाग्य योजना कोरोना काल में गरीब परिवारों को नि:शुल्क राशन योजना, उज्जवला योजना से गैस कनेक्शन, ग्रामीण सड़क योजना, शौचालय योजना, स्वच्छता मिशन ने प्रगति को और तेज कर दिया है।
आज उत्तर प्रदेश धार्मिक पर्यटन में देश में प्रथम स्थान पर हो गया है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, अयोध्या में राम मंदिर, मथुरा में कृष्ण जन्म स्थान, माता विंध्यवासिनी व शकुम्भरी देवी का विकास कार्य अद्वितीय रहा है। एक जिला एक उत्पाद योजना सफल सिद्ध हुई है। विद्युत उत्पादन में जिला मुख्यालय में 24 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली पहुंची है तथा 1 लाख 21 हजार गांवों में बिजली पहुंचाने का कार्य पूरा हुआ है। शिक्षा, रोजगार और महंगाई के मोर्चे पर वर्तमान सरकार को तीखे विरोध का सामना करना पड़ा है। सांस्कृतिक संरक्षण व राष्ट्रवाद के क्षेत्र में कल्पनातीत कार्य हुए हैं जिसमें संभवत: आजादी के 70 वर्षों के बाद प्रदेश के बहुसंख्यक समाज को हार्दिक शांति व संतोष प्राप्त  हुआ है और उनकी घोर निराशा, उच्च मनोबल में परिवर्तित हुई है।  धारा 370 और 35ए की समाप्ति, राम मंदिर निर्माण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़े गौरव ने सभी जनता का मस्तक गर्व से ऊंचा उठा दिया है। यह असंभव कार्य संभव बना कर बीजेपी ने 'जो कहा उसे पूरा किया का वचन निभाया है। अल्पसंख्यक समाज में भी दंगों पर काबू करना, बिना भेदभाव के उनको सुविधाओं को उपलब्ध कराने व तीन तलाक की प्रक्रिया में सुधार लाने के कारण बीजेपी के प्रति निकटता को बढ़ाया है। यद्यपि असदुद्दीन ओवैसी के प्रदेश में सघन प्रचार के कारण मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण बढ़ा है। समाजवादी पार्टी को उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय का रणनीतिक वोट केवल उन्हें ही  एकमुश्त  मिलेगा  परंतु ऐसा कम ही  होगा। वोट तो सभी के  बटेंगे। हो सकता है कि आगामी चुनाव राजनीति को कुछ नया आयाम दे।
समाजवादी पार्टी सहित सभी पार्टियों को योगी आदित्यनाथ और मोदी नेतृत्व का विकल्प प्रस्तुत करने में दशकों लगेंगे। अभी तो प्रदेश की जनता बीजेपी से बहुत नाराज नहीं दिखती है तथा समस्त वोटर सर्वे योगी को तथा बीजेपी को प्रथम स्थान पर ही दिखा रहे हैं। योगी की कर्मठता, ईमानदारी तथा बेवाकी सभी विपक्षियों पर भारी है। गठबंधन तो विगत चुनाव में भी सफल नहीं हुई थी और आज तो २०१७ के सापेक्ष  सत्तापक्ष की  स्थिति और सुथरी दिखाई पड़ती है। किसान आंदोलन, शिक्षक भर्ती, प्रश्नपत्र आउट हो जाने व लखीमपुरखीरी किसान आंदोलन का सत्तापक्ष द्वारा  डैमेज कंट्रोल तेजी से संभव बनाया जा रहा है। मोदी जी पर और योगी जी पर जनता का आज भी विश्वास कायम है और इनके आसपास अभी कोई पहुंचता दिखाई नहीं पड़ रहा है। चुनाव नजदीक आते तथा घोषणा होते ही बीजेपी की रणनीति व संगठन क्षमता और बढऩे वाली है। विपक्षियों के सभी पत्ते खुल चुके हैं अत: नया कुछ नहीं आने वाला है। जातीय गणित साधना सभी के लिए टेढ़ी खीर है। इस चुनाव में भाजपा के सामने संगठन बल बढ़ाकर प्रदर्शन दोहराने और विपक्षियों के दमखम की अग्नि परीक्षा है। अखिलेश के साथ पश्चिम में जयंत की चौधराहट कायम रहे यह मुश्किल लग रहा है। जयंत की मुश्किलें बढ़ रही है। पश्चिम में जाट गुर्जर और मुसलमान एकता रालोद की पाला बदल नीति से कमजोर हुई है और रालोद की साख गिरी है। यद्यपि विरोधी दल प्रचार कर रहे हैं कि योगी के विकास का दावा थोथा है। मोदी ने वाराणसी में भाजपा के 13 मुख्यमंत्रियों की बैठक में युवा संगठन की बैठक में व संगठन की बैठक में स्पष्ट किया है कि इस वर्ष चुनाव में रिपोर्ट कार्ड व लोकप्रियता के आधार पर विधायकों को टिकट मिलेंगे। विधायक सिफारिश से दूर रहें और ऐसा काम करें कि जनता आपको फिर चुने। इस बात की संभावना बढ़ रही है कि यूपी में सौ से डेढ़ सौ वर्तमान विधायकों के टिकट कटेंगे। यदि भाजपा यह हिम्मत दिखाती है तो उसकी जीत पक्की हो सकती है।
लेखक लखनऊ जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के निदेशक हैंFrom Blogger iPhone client

Saturday, 23 October 2021

रामजन्मभूमि कार्यारंभ का एकवर्ष

रामजन्मभूमि कार्यारम्भ का एक वर्ष
* अशोक कुमार सिन्हा
अयोध्या मे΄ श्रीराम जन्मस्थान पर निर्मित मन्दिर को तोडक़र छद्म मस्जिद बनाने वालों का अभियान 492 वर्ष के बाद टूट कर चकनाचूर हो गया। 5 अगस्त 2020 को भारत के प्रधानम΄त्री ने रामराज्य का श΄खनाद करते हुए नए भारत की आधारशिला रखी थी। नये मन्दिर का कार्यारम्भ हुए एक वर्ष पूरे हो रहे है΄। यह  राष्टï्र मन्दिर का शुभारम्भ था। यह सम्पूर्ण विश्व की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। श्रीरामलला का म΄गलभवन वर्तमान सन्दर्भ मे΄ एक चमत्कार से कम नही΄ है। श्री मोहन भागवत जी ने इस अवसर पर भूमि पूजन करते समय कहा था कि ‘‘अपने हृदय मे΄ केवल राम को ही समाहित कर ले΄, रामजी के आदर्श को अपने हृदय मे΄ धारण कर ले΄। ‘..तेही΄ के हृदय बसेहु रघुराई’. ऐसा जीवन बनाना, यह मुख्य काम है। उसके लिये मन्दिर बनाने का आग्रह है। भावना को सम्मान दिया जाना चाहिये। हमारे आदर्श श्रीराम के मन्दिर को तोडक़र, हमे΄ अपमानित करके हमारे जीवन को भ्रष्ट किया गया है। हमे΄ उसे फिर से खड़ा करना है।’’
राममन्दिर का शिलान्यास 1989 मे΄ पहले ही हो गया था। 15 अगस्त 2020 को केवल मन्दिर निर्माण कार्य का शुभारम्भ हुआ। जनआ΄दोलन तो भूमि प्राप्त करने का था। भारत के सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय आया तो एक न्यास बनाकर कार्य किया गया। राम भतो΄ मे΄ टोलिया΄ बनाकर धन स΄ग्रह अभियान चलाया। उनके प्रथम प्रयास मे΄ ही ढाई हजार करोड़ रुपए एकत्र हो गये। बाद मे΄ और भी समर्पण राशि आती गई। पूजा के लिए एक चा΄दी की ईंट की आवश्यकता थी। राम भतो΄ ने अयोध्या मे΄ चा΄दी के ईंटो΄ का अ΄बार लगा दिया। राम भतो΄ की आका΄क्षा है कि सम्पूर्ण राममन्दिर के शिखरो΄ पर स्वर्ण परत चमके। प्रभु राम यह कार्य भी पूर्ण करे΄गे।
ऐसे लोग जो राम के अस्तित्व को नकार रहे थे। न्यायालय मे΄ हलफनामा दे रहे थे कि राम काल्पनिक है। राम सेतु मिथक है। उसे तोड़े जाने की योजना बना रहे थे। ऐसे लोग आश्चर्यचकित है΄ कि रामभतो΄ के हृदय मे΄ विराजमान राम ऐसा चमत्कार करे΄गे कि पूरा विश्व अच΄भित हो जाएगा और जय सियाराम का जयकारा लगाने लगेगा।
देश के 75,000 टोलियो΄ मे΄ 1,00,000 कार्यकर्ताओ΄ ने घर-घर जा कर 10 करोड़ परिवारो΄ से सम्पर्क किया। 4,00,000 गा΄वो΄ मे΄ यह सम्पर्क अभियान चला। विश्व के इतिहास मे΄ यह सबसे बड़ा सम्पर्क अभियान पूर्णत: सफल रहा। मत, प΄थ, जाति, भाषा, प्रान्त सब के ब΄धन जकडऩ टूट गये। मन्दिर के नी΄व मे΄ मिर्जापुर के पत्थर, परकोटे पर जोधपुर का पत्थर और मन्दिर मे΄ भरतपुर के व΄शी पहाड़ का पत्थर लगाने का निर्णय हुआ। पूर्व मे΄ मन्दिर निर्माण की जो परिकल्पना बनाई गई थी उसे और भव्य और बड़ा रूप प्रदान किया गया। 400 फुट लम्बाई, 250 फुट चौड़ाई और 40 फुट गहराई का मलवा निकालकर ठोस मिर्जापुरी पत्थरो΄ से तथा कई परत के उाम क΄क्रीट सीमेन्ट से भरा जा चुका है। भारतीय प्रौद्योगिकी स΄स्थान मद्रास, मुम्बई सहित विश्वस्तर के वैज्ञानिक भराई सामग्री का ध्यान रख रहे है΄। जमीन तक कंक्रीट तथा उसके ऊपर 16.5 फुट चबूतरा बनेगा। मन्दिर भूतल से 161 फुट ऊंचा होगा। 361 फुट ल΄बा और 235 फुट चौड़ा होगा। कुल 160 खम्बे लगे΄गे। ढाई एकड़ मे΄ केवल मन्दिर होगा। उसके चारो΄ ओर की भूमि खरीदी गई है जहा΄ मन्दिर के 6 एकड़ मे΄ परकोटा बनेगा। वर्तमान मे΄ भूमि पर 500 विशाल वृक्ष है जिन्हे काटे बिना ही स्थाना΄तरित किया गया है। जिस प्रकार श्रीराम ने लोक स΄गठन से आत΄कवाद को समाप्त किया था उसी प्रकार देश की सज्जन शितयो΄ ने मिलकर दुष्ट शितयो΄ को पराजित किया है। उनके राष्ट्रविरोधी षडय΄त्रो΄ को विफल किया है। सदियो΄ से स΄घर्ष का सुखद अन्त किया है। यह मन्दिर का निर्माण ही नही΄, नये भारत का निर्माण हो रहा है। म΄दिर निर्माण राष्ट्र को जोडऩे का उपक्रम है। इससे नर और नारायण जुड़े΄गे, मन्दिर पर ध्वज पताका के रूप मे΄ भारत की कीर्ति लहराने जा रही है। राम की कीर्ति भारत के जनमन का मार्गदर्शन करती है।
विराट अयोध्या का पुनर्गठन हो रहा है। पूरे नगर की नई संरचना की जा रही है। रेलवे स्टेशन को अयोध्या की स΄स्कृति का रूप दिया गया है। अन्तर्राज्यीय हवाई अड्डा का निर्माण हो रहा है, अन्तर्राज्यीय बस टर्मिनल बन रहा है।
हिन्दू आस्था के केन्द्र राममन्दिर को शीघ्र बना कर पूरा करने का कार्य प्रगति पर है। आगामी तीन वर्षों मे΄ भतगणो΄ को आशा है कि वे मूल मन्दिर मे΄ पूजा अर्चना कर सके΄गे। चौरासी कोस की परिक्रमा मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया गया है तथा उसका चौड़ीकरण कार्य इसी माह प्रारम्भ हो रहा है। अयोध्या के छह प्रवेश द्वारो΄ का निर्माण नगर शैली मे΄ प्रारम्भ हो गया है। प्रयास है कि अयोध्या का प्राचीन गौरव पुनस्र्थापित हो। लगभग 1200 एकड़ की भव्य अयोध्या के प्रत्येक प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओ΄ के लिये आवासीय परिसर का प्रबन्ध होगा।
सरयू घाटो΄ के आस-पास सुन्दरीकरण होगा। बाईपास से नया घाट सरयू तट तक जाने के लिये स्मार्ट रोड, कला परियोजना, पशु संरक्षण, बाहरी रिंग रोड, रामायणकालीन पौधरोपण, रामायण थीम पार्क आदि का निर्माण किया जाएगा। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक विकास परियोजनाए΄ स΄चालित हो रही है। पत्थर के तराशने का कार्य चौगुनी गति गति से हो रहा है। ग्रीन फील्ड, टाउनशिप, आश्रम मठ विभिन्न राज्यो΄ के भवन, विश्वस्तरीय स΄ग्रहालय, पर्यटन  विशाल आधुनिकतम सुसज्जित होटल, धर्मशालाओ΄ के कार्य प्रगति पर है। रामजन्मभूमि परिसर मे΄ ही राम जन्मभूमि आन्दोलन का स्मारक भी बनाया जाएगा। इसी स΄ग्रहालय मे΄ राम जन्मभूमि की प्रमाणिकता प्रदर्शित करते साहित्य, साक्ष्य पुरावशेषो΄ और मन्दिर की दावेदारी से जुड़े प्रस΄गो΄ की धरोहर भी स΄कलित कर प्रदर्शित की जाये΄गी। अयोध्या के मुख्यमार्ग और भवनो΄ को केसरिया र΄ग मे΄ र΄गे जाने की योजना है। सभी साइन बोर्ड एक जैसे हो΄गे, बोर्ड की ल΄बाई-चौड़ाई निर्धारित होगी। अयोध्या के आस-पास पौराणिक स्थलो΄ का भी सुन्दरीकरण और मार्ग सुधार का कार्य प्रारम्भ हो गया है। दशरथ समाधि स्थल, गौतम ऋषि का आश्रम, बाबा म΄गेश्वर महादेव, यमदाग्नि ऋषि का आश्रम, सूर्यकुन्ड, भरतकुन्ड, पिशाची कुन्ड और पौराणिक कुन्डो΄ को हेरिटेज रूप दिया जाएगा।
पर्यावरण और हरियाली का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 251 ऐसे स्थलो΄ की पहचान की गई है जिनका पौराणिक महत्व है। सरकार की ओर से पावनपथ परियोजना चलाकर ग्रेटर अयोध्या का रूप दिया जाएगा। 500 करोड़ रुपए की लागत से सरयू तट पर प्रभुश्रीराम की विशाल प्रतिमा स्थापित होगी। योगी आदित्यनाथ का स΄कल्प है कि दुनिया की सबसे वैभवशाली नगरी का रूप अयोध्या को मिले। अवधपुरी को उसका पुराना वैभव प्राप्त हो। उार प्रदेश राम, कृष्ण और शिव का प्रदेश के रूप मे΄  विश्वविख्यात रहे।
* प्रमुख, विश्व संवाद केन्द्र, अवध।  

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